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लोकसभा चुनाव:चौथे चरण में क्या अपना किला बचा पाएगा एनडीए,भाजपा को विशेष चुनौती

पटना:चौथे चरण के मतदान में एनडीए के सामने किला बचाने की चुनौती है। यह इस मायने में है कि चौथे चरण के मतदान वाली सीटों पर विगत दो आम चुनावों से एनडीए का कब्जा है। चौथे चरण में दरभंगा, बेगूसराय, मुंगेर, समस्तीपुर व उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र में चुनाव है।तीन लोकसभा क्षेत्रों में विगत दस वर्षों से भाजपा का कब्जाचौथे चरण के आम चुनाव में तीन लोकसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां दस वर्षों से भाजपा का कब्जा रहा है। दरभंगा लोकसभा क्षेत्र में 2014 और 2019 के आम चुनाव में भाजपा की जीत हुई। यह अलग बात है कि इन दो आम चुनाव में भाजपा ने यहां से अपने प्रत्याशी बदल दिए। वर्ष 2014 के आम चुनाव में दरभंगा से भाजपा के टिकट पर कीर्ति आजाद को जीत मिली थी। वहीं 2019 में भाजपा ने दरभंगा से अपने प्रत्याशी को बदल दिया। गोपालजी ठाकुर ने यहां चुनाव लड़ा। भाजपा को प्रत्याशी बदलने का फायदा यह हुआ कि उसके वोट में 22.61 प्रतिशत का इजाफा हुआ। वर्ष 2014 के आम चुनाव में भाजपा प्रत्याशी कीर्ति आजाद को 37.98 प्रतिशत वोट आए थे तो 2019 में गोपालजी ठाकुर को 60.79 प्रतिशत वोट मिले। बेगूसराय की सीट भी दो आम चुनावों से भाजपा के कब्जे में है। भाजपा ने विगत दो आम चुनाव में यहां से अपने प्रत्याशी जरूर बदले, पर अपना किला बचाए रखा। वर्ष 2014 के आम चुनाव में भोला ङ्क्षसह को बेगूसराय लोकसभा सीट से जीत मिली थी। पर 2019 के आम चुनाव में भाजपा ने यहां से गिरिराज ङ्क्षसह को मैदान में उतारा। गिरिराज ङ्क्षसह भी भाजपा का किला बचाने में सफल रहे।

 

 

इसी तरह उजियारपुर की सीट भी विगत दो आम चुनाव से भाजपा के कब्जे में रही है। वर्ष 2014 में भाजपा के टिकट पर यहां से नित्यानंद राय जीते थे। वर्ष 2019 में भी भाजपा ने नित्यानंद राय को मौका दिया और वह किला बचाने में सफल रहे। इस बार भाजपा ने इन तीनों सीटों पर 2019  के ही अपने प्रत्याशी को मैदान में उतारा है।जदयू और लोजपा (रा) भी अपने किले को देख रहीचौथे चरण में जदयू और लोजपा (रामविलास) भी अपने किले को देख रही।

 

मुंगेर की लोकसभा सीट से जदयू के राजीव रंजन सिह उर्फ ललन सिंह फिर से एनडीए के प्रत्याशी हैं। वर्ष 2019 में उन्हें इस सीट से जीत मिली थी। वहीं 2014 में भी यह सीट एनडीए के कब्जे में थी। तब लोजपा के टिकट पर वीणा देवी को यहां से जीत मिली थी। समस्तीपुर की लोकसभा सीट भी इसी श्रेणी में है। इस सीट से 2019 में पहले लोजपा प्रत्याशी के रूप रामचंद्र पासवान की जीत हुई। उनके निधन के बाद हुए उप चुनाव में उनके पुत्र ङ्क्षप्रस राज को जीत मिली। वर्ष 2014 में भी लोजपा के टिकट पर रामचंद्र पासवान को यहां से जीत मिली थी।

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