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बेगूसराय में चर्चित दोहरा हत्याकांड: 20 साल बाद आया ऐतिहासिक फैसला

पटना: बेगूसराय के चर्चित दोहरा हत्याकांड सह कांग्रेस नेता ललन सिंह की हत्या के मामले में 20 साल बाद ऐतिहासिक फैसला आया है। इस मामले में भाजपा नेता मिथिलेश सिंह समेत 12 लोगों को दोषी ठहराते हुए **उम्रकैद** की सजा सुनाई गई है।

बेगूसराय सिविल कोर्ट के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शबा आलम ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने सभी आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 148 (हिंसक अपराध), और 149 (सामूहिक अपराध) के तहत दोषी पाया।
दोषी ठहराए गए 12 लोगों में भाजपा नेता मिथिलेश सिंह के साथ रोशन सिंह, रविंद्र सिंह, रणधीर कुमार उर्फ दुखा, सुनील सिंह, सुधीर सिंह, संजीव सिंह, कोमल सिंह, शालीग्राम सिंह, अनिल सिंह, मनोज सिंह और रंजीत सिंह शामिल हैं।

यह घटना 8 मार्च 2004 की है। शाम्हो थाना क्षेत्र में पैक्स अध्यक्ष और कांग्रेस नेता ललन सिंह व उनके साथी सिपुल सिंह की ठाकुरबाड़ी के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
चश्मदीद गवाह मुकेश सिंह, जो इस मामले में मुख्य अभियोगी भी हैं, ने बताया कि वे, ललन सिंह और सिपुल सिंह, अग्निकांड पीड़ितों के बीच राहत सामग्री बांटकर लौट रहे थे। तभी भाजपा नेता मिथिलेश सिंह और अन्य आरोपियों ने उन्हें घेरकर फायरिंग शुरू कर दी। हमले के बाद गवाह झाड़ियों में छिपकर घटना को देख रहे थे।

मुकेश सिंह ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि हत्या के बाद आरोपियों ने ललन सिंह का राइफल भी लूट लिया और शवों को ठिकाने लगाने की कोशिश की। लेकिन 200 मीटर आगे जाने पर भीड़ इकट्ठा हो गई, जिससे आरोपी मौके से भाग गए।

– **2015:** बेगूसराय सिविल कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
– **हाईकोर्ट में याचिका:** पीड़ित परिवार ने इस फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने मामले की पुनः सुनवाई का आदेश दिया और चार महीने में सुनवाई पूरी करने को कहा।
– **2024:** बेगूसराय सिविल कोर्ट ने दोबारा सुनवाई के बाद सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।

सुनवाई के दौरान 10 गवाहों ने अपनी गवाही दर्ज कराई। अभियोजन पक्ष के वकील दिलीप कुमार और पीड़ित परिवार के वकील शाह इज्जूर रहमान ने मामले को मजबूती से रखा। वहीं, बचाव पक्ष के वकील मंसूर आलम, शशि भूषण झा, और राजेश सिंह ने आरोपियों की पैरवी की।

अपर लोक अभियोजक दिलीप कुमार ने इसे **ऐतिहासिक फैसला** बताते हुए कहा कि यह पहली बार हुआ है कि जिस कोर्ट ने पहले आरोपियों को बरी किया था, उसी कोर्ट ने बाद में इन्हें दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा दी।

20 साल बाद आए इस फैसले ने लोगों के बीच चर्चा का नया विषय बना दिया है। पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने पर संतोष व्यक्त किया, जबकि इस फैसले से समाज में कानून और न्याय व्यवस्था पर विश्वास मजबूत हुआ है।

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