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IMD की बड़ी भविष्यवाणी: अक्टूबर में होगी सामान्य से अधिक बारिश, किसानों और राज्यों को सतर्क रहने की सलाह

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार को जारी अपने नवीनतम मौसमी पूर्वानुमान में कहा है कि अक्टूबर महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। विभाग के अनुसार, इस बार मानसून के आखिरी चरण में 50 साल के औसत से लगभग 115 प्रतिशत तक वर्षा दर्ज की जा सकती है। यह खबर किसानों और राज्यों दोनों के लिए राहत और सतर्कता का संदेश लेकर आई है, क्योंकि जहां अधिक बारिश से खरीफ फसलों को फायदा हो सकता है, वहीं बाढ़ जैसे हालात भी कई इलाकों में चुनौती बन सकते हैं।

IMD के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि उत्तर और पूर्वी भारत में इस बार मानसूनी प्रणाली सक्रिय बनी रहेगी। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों से नमी भरी हवाएँ लगातार आ रही हैं, जिससे मध्य, पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। वहीं, उत्तर-पश्चिम भारत — खासकर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान — में भी औसत से थोड़ी अधिक वर्षा दर्ज होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि “इस वर्ष मॉनसून की वापसी सामान्य से कुछ देरी से होगी, जिसके चलते अक्टूबर का पहला और दूसरा सप्ताह विशेष रूप से नम रह सकता है।”

कृषि विशेषज्ञों ने इस पूर्वानुमान को किसानों के लिए एक “मिश्रित संकेत” बताया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के अनुसार, जिन इलाकों में धान, मक्का और गन्ने की फसल खड़ी है, वहां यह बारिश उपज में सुधार ला सकती है। लेकिन जिन राज्यों में कटाई का समय नजदीक है, जैसे पंजाब और उत्तर प्रदेश, वहां अतिरिक्त बारिश से फसल गिरने या खराब होने का खतरा बना रहेगा। इस कारण कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटाई से पहले मौसम की स्थिति पर नजर रखें और अनाज भंडारण के सुरक्षित उपाय करें।

मौसम विभाग ने राज्यों को भी आपदा प्रबंधन की तैयारी रखने की चेतावनी दी है। खासकर बिहार, असम, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भारी बारिश और निचले इलाकों में जलभराव की संभावना जताई गई है। वहीं दक्षिण भारत के केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में भी कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों में अगले दो हफ्तों तक रुक-रुक कर बारिश का दौर बना रहेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि एल नीनो के प्रभाव में कमी और हिंद महासागर में सकारात्मक डिपोल की स्थिति इस अतिरिक्त वर्षा का प्रमुख कारण है। इससे समुद्री नमी का प्रवाह बढ़ा है और वर्षा तंत्र सक्रिय हुआ है।
IMD ने स्पष्ट किया है कि यह अतिरिक्त वर्षा असामान्य नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के चलते मौसम के पैटर्न में हो रहे बदलाव का एक उदाहरण है।

कुल मिलाकर, अक्टूबर की यह अतिरिक्त बारिश किसानों के लिए वरदान भी बन सकती है और चुनौती भी। अब आने वाले दो हफ्ते तय करेंगे कि यह मानसून भारत के लिए कितनी राहत या मुश्किलें लेकर आता है।

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