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जो अपने खून के नहीं हुए, वो दूसरों के क्या सगे होंगे,भाई का टिकट काटने पर लालू परिवार पर बरसी शरद यादव की बेटी

पटना (स्पेशल डेस्क): बिहार विधानसभा चुनाव के नामांकन के आखिरी दिन महागठबंधन में हड़कंप मच गया। मधेपुरा और आलमनगर सीटों पर सीट बंटवारे को लेकर चले लंबे ड्रामे के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने अंतिम समय में फैसला बदला लिया। मधेपुरा विधानसभा सीट से दिवंगत समाजवादी नेता शरद यादव के बेटे शांतनु बुंदेला का टिकट काटकर पार्टी ने मौजूदा विधायक प्रो. चंद्रशेखर को ही मैदान में उतारने का ऐलान किया। इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में भूचाल ला दिया है, तो वहीं शरद यादव परिवार ने लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव पर विश्वासघात का गंभीर आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर तीखा प्रहार किया।

 

सूत्रों के मुताबिक, नामांकन की अंतिम तारीख तक शांतनु बुंदेला को मधेपुरा से टिकट मिलने की चर्चा जोरों पर थी। शरद यादव की कर्मभूमि रही इस सीट पर उनके बेटे को विरासत के नाम पर मौका देने की बात तय मानी जा रही थी। लेकिन RJD हाईकमान ने आखिरी पलों में प्रो. चंद्रशेखर पर भरोसा जताते हुए टिकट फाइनल कर दिया। प्रो. चंद्रशेखर ने 2010, 2015 और 2020 के विधानसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज कर यह सीट RJD का मजबूत गढ़ बना चुके हैं। 2020 में उन्होंने JDU के निखिल मंडल को 15,072 वोटों से हराया था।

 

इस फैसले से नाराज शांतनु बुंदेला ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां किया। उन्होंने लिखा, “मेरे खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र रचा गया। समाजवाद की हार हुई।” शांतनु का यह पोस्ट वायरल होते ही शरद यादव की बेटी सुभाषिनी शरद यादव ने इसे रीपोस्ट करते हुए लालू परिवार और तेजस्वी यादव पर सीधा हमला बोला। सुभाषिनी ने ट्वीट किया, “जो अपने खून के नहीं हुए, वो दूसरों के क्या सगे होंगे। जो अपने ही परिवार के वफादार नहीं, वो किसी और के लिए कैसे भरोसेमंद हो सकते हैं? ये विश्वासघात की पराकाष्ठा और उनकी असहजता का उत्कृष्ट उदाहरण है। जो षड्यंत्र इन्होंने रचा है, अब वही षड्यंत्र इनके खिलाफ जनता रचेगी।”

 

शरद यादव परिवार का यह खुला आक्रोश महागठबंधन के लिए बुरी खबर माना जा रहा है। शरद यादव, जो सात बार सांसद रह चुके थे और मधेपुरा को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले समाजवादी आइकन थे, उनके परिवार का RJD से पुराना नाता रहा है। शांतनु ने हाल ही में तेजस्वी यादव के ‘बिहार अधिकार यात्रा’ में कोसी क्षेत्र में उनके साथ रथ यात्रा की थी, जिससे टिकट की उम्मीदें और मजबूत हुई थीं। लेकिन अंतिम फैसले ने इन सबकी हवा निकाल दी।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उलटफेर RJD की आंतरिक गुटबाजी को उजागर करता है। मधेपुरा सीट पर यादव वोट बैंक हावी है, जहां से 1957 से अब तक केवल यादव उम्मीदवार ही जीते हैं। प्रो. चंद्रशेखर की उम्मीदवारी से पार्टी का वोटबैंक सुरक्षित रह सकता है, लेकिन शरद यादव जैसे दिग्गज के परिवार को नजरअंदाज करने से समाजवादी समर्थकों में नाराजगी बढ़ सकती है। आलमनगर सीट पर भी अंतिम समय में बदलाव की चर्चा है, जहां JDU के नरेंद्र नारायण यादव मजबूत दावेदार हैं।

 

महागठबंधन के प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर टिप्पणी से इनकार कर दिया, लेकिन पार्टी के अंदर खलबली साफ दिख रही है। बिहार चुनाव का पहला चरण 6 नवंबर को है, जिसमें मधेपुरा भी शामिल है। ऐसे में यह विवाद विपक्षी NDA के लिए सुनहरा मौका बन सकता है। शरद यादव परिवार का अगला कदम क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। क्या वे स्वतंत्र उम्मीदवारी देंगे या किसी अन्य गठबंधन की ओर रुख करेंगे? राजनीतिक गलियारों में यही सवाल गूंज रहे हैं।

 

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