प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की अपनी चार दिवसीय विदेश यात्रा के अंतिम चरण में बुधवार को इथियोपिया से ओमान के लिए रवाना हो गए। यह दौरा भारत की कूटनीतिक सक्रियता और पश्चिम एशिया तथा अफ्रीकी देशों के साथ मजबूत होते संबंधों को दर्शाता है। प्रधानमंत्री की इस यात्रा पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास नजर बनी हुई है।
अपनी विदेश यात्रा के पहले चरण में प्रधानमंत्री मोदी ने महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लिया और कई रणनीतिक समझौतों पर चर्चा की। इथियोपिया प्रवास के दौरान उन्होंने व्यापार, विकास सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया। इस दौरान भारत-अफ्रीका साझेदारी को नई दिशा देने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।
अब ओमान दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात ओमान के शीर्ष नेतृत्व से होने की संभावना है। इस यात्रा में ऊर्जा, निवेश, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और प्रवासी भारतीयों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है। ओमान पश्चिम एशिया में भारत का एक अहम रणनीतिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से मजबूत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत-ओमान संबंधों को नई ऊंचाई दे सकती है। भारत के लिए ओमान ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण देश है। वहीं, खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लाखों भारतीयों के हितों को लेकर भी यह दौरा अहम माना जा रहा है।प्रधानमंत्री मोदी की यह तीन देशों की यात्रा भारत की “वसुधैव कुटुंबकम” और सक्रिय वैश्विक कूटनीति की सोच को भी दर्शाती है। ओमान दौरे के बाद इस यात्रा का समापन होगा, लेकिन इसके दूरगामी कूटनीतिक और आर्थिक प्रभाव आने वाले समय में देखने को मिल सकते हैं।

