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नरकटियागंज-सीतामढ़ी-दरभंगा व सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर दोहरीकरण को मंजूरी

Patna:समस्तीपुर रेल मंडल के अंतर्गत नरकटियागंज से सीतामढ़ी होते हुए दरभंगा और सीतामढ़ी से मुजफ्फरपुर के बीच रेल लाइन के दोहरीकरण की योजना को मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना पर कुल 4,553 करोड़ रुपये की लागत आएगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस योजना की जानकारी दी। बाद में मंथन सभागार में आयोजित प्रेसवार्ता में डीआरएम विनय श्रीवास्तव ने बताया कि यह रेल लाइन हाई-स्पीड कॉरिडोर के रूप में विकसित होगी, जिसमें ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी। यह लाइन देश के सभी प्रमुख बंदरगाहों से भी जुड़ जाएगी। परियोजना के अंतर्गत 310 पुल बनाए जाएंगे, जिनमें तीन बड़े, 99 मध्यम और 208 छोटे पुल होंगे। कुल 256 किलोमीटर लंबा यह दोहरीकरण कार्य अगले पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना में 6.5 करोड़ पेड़ लगाने, 87 लाख मानव कार्य दिवस सृजित करने और 162 करोड़ किलो कार्बन डाइऑक्साइड की बचत का भी प्रावधान है। प्रेसवार्ता में सीनियर डीसीएम अनन्या स्मृति और जनसंपर्क पदाधिकारी आर के सिंह भी मौजूद थे।

इस परियोजना के पूरा हो जाने के बाद उत्तर-पूर्व क्षेत्र से मिथिलांचल की कनेक्टिविटी में भी सुधार होगा। साथ ही, ‘चिकन नेक’ कनेक्टिविटी को भी बढ़ावा मिलेगा और बीरगंज कंटेनर टर्मिनल को लाभ पहुंचेगा। उल्लेखनीय है कि दरभंगा-समस्तीपुर रेल खंड का दोहरीकरण पहले से ही प्रगति पर है, जिससे समस्तीपुर से दरभंगा-सीतामढ़ी-नरकटियागंज खंड के दोहरीकरण का कार्य भी पूरा हो सकेगा। साथ ही, पिछले साल ही रेलवे ने गोरखपुर से पनियाहवा खंड के दोहरीकरण योजना को मंजूरी दी थी।

 

उत्तर बिहार और पूर्वोत्तर राज्य को जोड़ने का काम करेगी

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस परियोजना को समझाते हुए बताया कि, “इस परियोजना में कम से कम 40 पुल हैं। इसमें पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, दरभंगा और मुजफ्फरपुर जिले शामिल होंगे। इस परियोजना के कारण बिहार को अब पूर्वी बंदरगाहों से सम्पर्क आसान हो जायेगा। इसका मतलब है कि अगर कोई उद्योग मिथिलांचल (उत्तर बिहार) में आना चाहता है, तो उसे बंदरगाह कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा,”

भारत-नेपाल सीमा से संपर्क

इस परियोजना में भारत-नेपाल सीमा पर एक महत्वपूर्ण परिवहन गलियारा तैयार किया जायेगा। रेल मंत्री ने कहा, “आज, मिथिलांचल में एक बहुत ही महत्वपूर्ण परियोजना, जो उत्तर बिहार और पूर्वोत्तर को रणनीतिक संपर्क प्रदान करती है, को कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई… यह पूरा गलियारा भारत और नेपाल की सीमा पर एक प्रमुख परिवहन गलियारा बन जाएगा। उत्तर बिहार और मिथिलांचल के लोगों को अच्छी रेल कनेक्टिविटी मिलेगी।” इस परियोजना के तैयार होने से उत्तरी राज्यों और पूर्वोत्तर के बीच संपर्क और मजबूत हो जायेगा साथ ही मालगाड़ियों के साथ-साथ यात्री ट्रेनों की आवाजाही में सुविधा होगी। इस योजना से सामाजिक-आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को होगा फायदा

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों के बारे में संवाददाताओं को जानकारी देते हुए कहा, “256 किलोमीटर लंबी रेलवे परियोजना से उत्तर प्रदेश और उत्तरी बिहार को लाभ होगा। यह भारत-नेपाल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि यह नेपाल के बीरगंज में अंतर्देशीय कंटेनर डिपो को जोड़ेगी। इससे खाद्यान्न, उर्वरक, सीमेंट, कंटेनर आदि की आवाजाही में तेजी आएगी। दूसरी रेलवे परियोजना से मध्य और उत्तरी भारत का दक्षिणी भारत से संपर्क बेहतर होगा, जिससे अमरावती, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता के बीच सीधा संपर्क होगा।”

अयोध्या से सीतामढ़ी से सीधा सम्पर्क

इस रेल परियोजना में अयोध्या से सीतामढ़ी के लिए यात्रा आसान हो जाएगी। इसके लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस फैसला का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया X पर पोस्ट किया कि, “दिनांक 22.09.2024 को पत्र के माध्यम से मैंने आदरणीय प्रधानमंत्री जी से माँ सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी (पुनौरा धाम) हेतु रेल सम्पर्कता के संबंध में अनुरोध किया था। आज अयोध्या से मॉ सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी तक 4,553 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 256 किलोमीटर की रेल लाइन के दोहरीकरण का फैसला केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक में लिया गया है। यह फैसला स्वागतयोग्य है। इस रेल मार्ग के बन जाने से श्रद्धालुओं को अयोध्या के साथ ही मॉ सीता की जन्मस्थली पुनौरा धाम आने में सुविधा होगी। इसके लिये मैं आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रति आभार व्यक्त करता हूं।”

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