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उत्कर्ष किशोर : बिहार का वह युवा जो नौकरी मांगने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बना

~~~ मेराज नूरी
बिहार में जब भी युवा नेतृत्व और सामाजिक उद्यमिता की बात होती है, तो एक नाम बरबस जुबान पर आता है – उत्कर्ष किशोर। मात्र 33 साल की उम्र में उत्कर्ष ने जो मुकाम हासिल किया है, वह न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि बिहार के लाखों युवाओं के लिए एक जीता-जागता मॉडल भी है।बिहार सरकार के समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी के आप्त सचिव (OSD) के रूप में हाल ही में दूसरी बार नियुक्ति होना कोई छोटी बात नहीं है। यह नियुक्ति उनकी कार्यकुशलता, निष्ठा और ज़मीनी समझ का प्रमाण है। इससे पहले भी वे मंत्री जी के आप्त सचिव रह चुके हैं और उनकी कार्यशैली से मंत्री से लेकर मंत्रिमंडल सचिवालय तक सभी प्रभावित रहे। यही वजह है कि मंत्रिमंडल सचिवालय ने पुनः उन्हें यह महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी सौंपी।लेकिन उत्कर्ष सिर्फ़ एक कुशल प्रशासक या राजनीतिक नियुक्त व्यक्ति नहीं हैं। वे एक सफल उद्यमी, दूरदर्शी सामाजिक कार्यकर्ता और बिहार के सबसे चर्चित युवा संगठन ‘टीम यूके’ (Team UK) के संस्थापक हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक, लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर और देश के प्रतिष्ठित संस्थान से मानव संसाधन में एमबीए करने के बाद उत्कर्ष के पास कॉर्पोरेट जगत में चमकदार करियर का पूरा मौका था। अच्छी सैलरी, विदेशी पोस्टिंग, लग्ज़री लाइफ – सब कुछ उनके कदमों में था। लेकिन उनका मन कहीं और था। वे बिहार लौटे और तय किया कि वे नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनेंगे।

कोरोना काल में जब लाखों मजदूर सड़कों पर थे, तब उत्कर्ष ने पटना में ‘कॉस्मो ड्राइव प्राइवेट लिमिटेड’ और ‘आर्वी टेक’ जैसी कंपनियाँ शुरू कीं। ऑटोमोबाइल मॉडिफिकेशन और टेक्नोलॉजी सेक्टर में इन कंपनियों ने सैकड़ों बेरोज़गार युवाओं को रोज़गार दिया। यही नहीं, टीम यूके के बैनर तले उन्होंने पूरे बिहार में करीब 8,000 परिवारों को प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से रोज़गार और सहायता पहुँचाई।कोविड के दौरान टाटा फाउंडेशन ने भी टीम यूके के कार्यों की सार्वजनिक रूप से सराहना की थी। सैनिटरी पैड वितरण, मास्क-सैनिटाइज़र के साथ जागरूकता अभियान, जरूरतमंदों को भोजन पैकेट – ये सब उत्कर्ष और उनकी टीम की मेहनत का नतीजा था। लेकिन उत्कर्ष का फोकस सिर्फ़ दान पर नहीं, आत्मनिर्भरता पर है। वे कहते हैं, “मैं चीजें दान नहीं करना चाहता जो लोग खुद जुटा सकते हैं। मैं उन्हें वह कौशल और अवसर देना चाहता हूँ जिससे वे हमेशा के लिए आत्मनिर्भर बनें।”उनके पिता रिटायर्ड आईएएस श्री श्याम किशोर और माँ श्रीमती अंजू देवी (प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता) से उन्हें सामाजिक संवेदनशीलता विरासत में मिली, लेकिन उत्कर्ष ने अपनी अलग पहचान बनाई। उनका आदर्श रतन टाटा हैं और वे भी ठीक वैसे ही बनना चाहते हैं – एक ऐसा उद्यमी जो कमाई के साथ-साथ अपना समय, कौशल और विचार भी समाज को दान करे।

 

आज उत्कर्ष किशोर बिहार के युवाओं के लिए एक मिसाल हैं। वे साबित कर रहे हैं कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो बिहार में भी बड़े सपने सच हो सकते हैं। मंत्री के आप्त सचिव के रूप में अब उनके कंधों पर समाज कल्याण विभाग की योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी बनाने की ज़िम्मेदारी है। जानकारों का मानना है कि उनकी ऊर्जा, अनुभव और नेटवर्क से बिहार का समाज कल्याण विभाग नई ऊँचाइयों को छुएगा।उत्कर्ष किशोर जैसे युवा ही बिहार का भविष्य हैं – जो नौकरी मांगते नहीं, नौकरी पैदा करते हैं; जो दान नहीं, सम्मानजनक आजीविका देते हैं; और जो बिहार को बाहर से नहीं, बिहार के अंदर से बदलना चाहते हैं।ऐसे युवाओं को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी हम सबकी है।

(लेख उनके सोशल मीडिया की गतिविधियों और मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है)

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