नई दिल्ली: इंडिगो की बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने और हजारों यात्रियों के एयरपोर्ट पर फंसने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने इसे “गंभीर राष्ट्रीय संकट” करार देते हुए केंद्र सरकार और डीजीसीए से पूछा कि आखिर ऐसा हाल क्यों होने दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इंडिगो की लगातार कैंसिलेशन और देरी से सिर्फ यात्रियों को ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान हुआ है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस मनमोहन और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने यह सवाल भी उठाया कि जब इंडिगो की उड़ानें बंद थीं, तो अन्य एयरलाइंस ने किराया 35–39 हजार रुपये तक कैसे बढ़ा दिया? कोर्ट ने इसे “अवसरवाद” बताते हुए कहा कि 5,000 रुपये का टिकट इतनी तेजी से 39,000 कैसे हो गया। एयरलाइंस की ऐसी बढ़ोतरी को अदालत ने अनुचित ठहराते हुए केंद्र और डीजीसीए से सख्त कार्रवाई की अपेक्षा जताई।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इंडिगो सभी प्रभावित यात्रियों को DGCA के मौजूदा दिशा-निर्देशों और भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत पूरा मुआवजा दे। अदालत ने साफ कहा कि मुआवजा सिर्फ उड़ान रद्द होने के लिए नहीं, बल्कि यात्रियों को हुई परेशानी, उत्पीड़न और समय के नुकसान के लिए भी होना चाहिए। अदालत ने चेतावनी दी—“यात्रियों के अधिकार सर्वोपरि हैं, मुआवजे में किसी भी तरह की कोताही स्वीकार नहीं होगी।”

