बिहार में होने वाले आगामी पंचायत चुनाव इस बार तकनीक के लिहाज से ऐतिहासिक होने जा रहे हैं। राज्य सरकार ने फर्जी मतदान और चुनावी धांधली पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए फेशियल रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल का फैसला किया है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने औरंगाबाद में मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि इस नई व्यवस्था से बोगस वोटरों की पहचान मौके पर ही हो सकेगी और दोबारा वोट डालने की कोशिश नाकाम हो जाएगी।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि मतदान केंद्रों पर लगाए गए कैमरे मतदाताओं के चेहरे को पहचानेंगे। यदि कोई व्यक्ति पहले ही वोट डाल चुका होगा और दोबारा मतदान के लिए पहुंचेगा, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट कर देगा। इससे न केवल फर्जी वोटिंग रुकेगी, बल्कि पंचायत चुनाव की पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। यह फैसला पिछले चुनावों में सामने आई शिकायतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
इस बार पंचायत चुनाव में कई और अहम बदलाव भी किए गए हैं। नया आरक्षण रोस्टर लागू होगा और मतदान पूरी तरह ईवीएम के जरिए कराया जाएगा। छह अलग-अलग पदों के लिए एक ही दिन मतदान होगा, जिसके लिए अलग-अलग रंगों की छह बैलेट यूनिट लगाई जाएंगी। मतगणना के दौरान भी विशेष तकनीक का सहारा लिया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। गौरतलब है कि बिहार में पिछला पंचायत चुनाव दिसंबर 2021 में हुआ था और मौजूदा पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल 2026 के अंत तक पूरा होगा। ऐसे में यह चुनाव तकनीक, पारदर्शिता और भरोसे का नया मॉडल बनने की ओर बढ़ रहा है, जिससे लोकतंत्र की नींव और मजबूत होने की उम्मीद है।

