बिहार के बौद्ध सर्किट का दायरा अब और व्यापक हो गया है। राज्य में बौद्ध पर्यटन अब केवल बोधगया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बुद्ध के जीवन और बौद्ध धर्म से जुड़े कई ऐतिहासिक स्थलों को इसमें शामिल किया गया है। इसी क्रम में अब कहलगांव को भी बौद्ध पर्यटकों के मानचित्र पर जगह मिली है और पहली बार भागलपुर जिले को बिहार के बुद्धिस्ट सर्किट में शामिल किया गया है। इसके साथ ही बिहार टूरिज्म के ब्राउजर में कहलगांव स्थित विक्रमशिला विश्वविद्यालय के भग्नावशेष को प्रमुख स्थान दिया गया है, जिससे राज्य में आने वाले देश-विदेश के बौद्ध पर्यटकों का आकर्षण और बढ़ने की उम्मीद है।
विक्रमशिला विश्वविद्यालय के भग्नावशेष की पहचान और ब्रांडिंग को मजबूत करने के लिए बोधगया समेत अन्य प्रमुख बौद्ध स्थलों पर आने वाले पर्यटकों के बीच विशेष ब्राउजर वितरित किए जा रहे हैं। 13वीं शताब्दी ईस्वी में पाल वंश के राजा धर्मपाल द्वारा स्थापित विक्रमशिला विश्वविद्यालय अपने समय में बौद्ध शिक्षा का एक प्रमुख और जीवंत केंद्र रहा है। यहां दर्शनशास्त्र, धर्मशास्त्र, तत्व मीमांसा, व्याकरण, तर्कशास्त्र, तंत्रवाद जैसे विषयों की शिक्षा दी जाती थी और बड़ी संख्या में शिक्षक व विद्यार्थी अध्ययन करते थे।
परिसर में दो मंजिला स्तूप के बीच क्रूसनुमा संरचना, एक पुस्तकालय और कई पूजा-अर्चना स्थल मौजूद हैं। इसके अलावा यहां एक तिब्बती मंदिर और एक हिंदू मंदिर भी स्थित है। बिहार टूरिज्म के ब्राउजर में गया, बोधगया, नालंदा, राजगीर, वैशाली, पटना, जहानाबाद, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जिलों को भी शामिल किया गया है। भागलपुर के जुड़ने के साथ ही अब बिहार के बुद्धिस्ट सर्किट में शामिल जिलों की संख्या आठ हो गई है, जिससे बौद्ध पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

