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असंसदीय शब्दों के बाद अब संसद परिसर में धरने प्रदर्शन पर भी लगी रोक

नई दिल्ली:अब संसद भवन में धरना,प्रदर्शन,उपवास नहीं कर सकेंगे सांसद।परिपत्र जारी हुआ।इस वक्त देश की संसद से एक बड़ी खबर से निकलकर सामने आ गई है। खबरों के अनुसार एक पत्र जारी किया गया है पुलिस के अनुसार अब संसद परिसर में किसी भी प्रकार के धरना प्रदर्शन और उपवास पर रोक लगा दी गई है। सरकार की ओर से यह अधिसूचना जारी की गई है इसके अनुसार अब संसद भवन परिसर में कोई भी सांसद चाहे वह पक्ष का हो या विपक्ष का किसी भी तरह का धरना प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे। नाही किसी तरह का उपवास कर पाएंगे। इस सिलसिले में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक फोटो ट्वीट किया है. इसके मुताबिक, संसद भवन (Parliament house) के परिसर में धरना, हड़ताल, भूख हड़ताल नहीं हो सकेगी.राज्यसभा सचिवालय के एक नए सर्कुलर में ये कहा गया है कि संसद भवन के परिसर में अब प्रदर्शन, विरोध, धरना, अनशन या धार्मिक समारोह आयोजित नहीं किए जा सकेंगे. धरना या विरोध पर सर्कुलर संसद में कुछ शब्दों के इस्तेमाल पर बैन के आदेश पर विपक्ष की नाराजगी के बीच आया है. ऐसे में मुख्य विपक्षी कांग्रेस ने इसकी भी आलोचना की है. 18 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से पहले राज्यसभा महासचिव पीसी मोदी ने नया बुलेटिन जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि सदस्यों का सहयोग अपेक्षित है.बुलेटिन में कहा गया है, ” सदस्य किसी भी प्रदर्शन, धरना, हड़ताल, अनशन या किसी धार्मिक समारोह के लिए संसद भवन के परिसर का उपयोग नहीं कर सकते हैं. ”

संसद भवन के परिसर में क्या अब धरना प्रदर्शन पर भी रोक रहेगी? इससे जुड़ा एक आदेश शेयर करते हुए कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा है. शेयर किये गए आदेश के मुताबिक, संसद भवन के परिसर में कोई सदस्य धरना, हड़ताल, भूख हड़ताल नहीं कर सकेगा. इसके साथ-साथ कोई धार्मिक कार्यक्रम भी वहां नहीं आयोजित हो सकेगा. इस फैसले पर विपक्ष भड़क गया है.हालांकि, बाद में सामने आया है कि संसद भवन में किसी भी धरना प्रदर्शन को लेकर पहले भी इस तरह के लेटर जारी करते रहे हैं.

 

 

बताते चलें कि हाल ही में एक और आदेश पारित किया गया था इसके अनुसार बहुत सारे शब्दों को संसद में प्रयोग करने पर रोक लगा दी गई थी।हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को स्पष्ट कर दिया कि संसद में किसी भी शब्द के इस्तेमाल पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, लेकिन प्रासंगिक आधार पर इसे हटा दिया जाएगा. उन्होंने कहा था कि सदस्य सदन की मर्यादा बनाए रखते हुए अपने विचार व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र हैं.लोकसभा सचिवालय की एक नई सर्कुलर में बुधवार को कहा गया कि ‘जुमलाजीवी’, ‘बाल बुद्धि’, ‘कोविड स्प्रेडर’, ‘स्नूपगेट’ जैसे शब्दों, यहां तक ​​कि ‘शर्मिंदा’, ‘दुर्व्यवहार’, ‘विश्वासघात’, ‘भ्रष्ट’, ‘नाटक’, ‘पाखंड’ और ‘अक्षम’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल को अब से लोकसभा और राज्यसभा दोनों में असंसदीय माना जाएगा. इस पूरे मामले पर विवाद बढ़ता देख लोकसभा स्पीकर ने सफाई भी दी। लोक सभा सचिवालय द्वारा जारी ‘असंसदीय शब्द 2021’ में शामिल शब्दों और वाक्यों पर जारी विवाद पर जवाब देते हुए लोक सभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि देश में भ्रम की स्थिति नहीं होनी चाहिए। किसी शब्द को बैन नहीं किया गया है, लोक सभा सचिवालय ने कुछ असंसदीय शब्दों को, जो लोकतंत्र की गरिमा के अनुकूल नहीं थे, को विलोपित किया है।

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