बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कारणों की विस्तृत समीक्षा की है। प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रतिनिधि और प्रवक्ता प्रोफेसर विजय कुमार मिट्ठू ने कहा कि पार्टी की पराजय के पांच प्रमुख कारण रहे। सबसे बड़ा कारण संगठन का कमजोर ढांचा है—पिछले आठ वर्षों से बूथ, पंचायत, जिला और प्रदेश स्तर पर मजबूत संगठन नहीं होने के चलते 1.16 लाख बूथों में से सिर्फ 21 हजार बूथों पर ही कांग्रेस के एजेंट मौजूद थे। चुनाव आयोग की प्रक्रियागत गलतियों और EVM मुद्दे पर भी कोई बड़ा आंदोलन नहीं खड़ा हो सका।
दूसरा बड़ा कारण रहा वोट खरीद और वोट प्रबंधन। प्रवक्ता के अनुसार, चुनाव के दौरान मतदाताओं के खातों में अंतिम समय तक पैसे भेजे गए, महिला मतदाताओं को आर्थिक लाभ का संदेश दिया गया और सरकार ने 19 वर्षों से लंबित मांगों को चुनाव से पहले पूरा किया—ये सभी परिस्थितियाँ कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित हुईं। वहीं पार्टी की आंतरिक संरचना भी कमजोर रही। कांग्रेस लंबे समय से लॉबी-विहीन पार्टी बनी रही है, जहां जमीनी कार्यकर्ताओं को न संगठन में स्थान मिला, न टिकट। वार रूम और पेड स्टाफ की व्यवस्था भी उल्टा प्रभाव छोड़ गई और संभावित उम्मीदवारों में असंतोष बढ़ा।
पांचवें और निर्णायक कारण के रूप में मिट्ठू ने समान विचारधारा वाले दलों के वोट बिखराव को बताया। ओवैसी की पार्टी, BSP और जनसुराज के प्रवेश से INDIA गठबंधन को लगभग 50 सीटों पर नुकसान हुआ। अंतिम समय तक सीटों का घमासान और 11 सीटों पर दोस्ताना मुकाबले ने भी गठबंधन की संभावनाओं को कम किया। उन्होंने कहा कि यदि ये भ्रम की स्थिति नहीं बनती तो विपक्ष 100 सीटें जीतकर मजबूत भूमिका निभा सकता था।

