संसदीय समिति ने कच्चे तेल के आयात पर भारत की बढ़ती निर्भरता को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संसद में हाल ही में पेश की गई अपनी रिपोर्ट में लोक उपक्रम समिति ने कहा कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 89 प्रतिशत आयात करता है, जिससे देश वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, आर्थिक प्रतिबंध, तेल उत्पादक देशों में नागरिक अशांति और प्रमुख समुद्री मार्गों में अवरोध जैसे जोखिम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं। विशेष रूप से स्वेज नहर और लाल सागर जैसे अहम पोत परिवहन मार्गों में किसी भी तरह की बाधा से कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है।
इन चुनौतियों को देखते हुए समिति ने सरकार से कच्चे तेल की आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने और प्रभावी जोखिम प्रबंधन तंत्र विकसित करने का आग्रह किया है। समिति का मानना है कि दीर्घकालिक रणनीति के तहत वैकल्पिक स्रोतों, दीर्घकालिक अनुबंधों और घरेलू ऊर्जा संसाधनों को मजबूत करना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

