कांग्रेस ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) का नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि सरकार जानबूझकर महात्मा गांधी का नाम हटाना चाहती है। केरल की वायनाड सीट से सांसद प्रियंका गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए सवाल किया कि एक सफल योजना का नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने कहा कि नाम बदलने से सरकारी दफ्तरों, कागजी कामकाज और प्रचार पर अनावश्यक खर्च बढ़ेगा, जिसका आम जनता को कोई लाभ नहीं होगा।
सरकार की ओर से संसद में मनरेगा का नाम बदलने से जुड़ा विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है, जिसे लेकर विपक्षी दलों में नाराजगी है। प्रस्तावित नए नाम ‘विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ को संक्षेप में ‘विकसित भारत जी राम जी’ कहा जा रहा है। प्रियंका गांधी ने कहा कि महात्मा गांधी न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में सम्मानित नेता हैं, ऐसे में उनका नाम हटाने के पीछे सरकार की मंशा समझ से परे है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संसद का कीमती समय जनता के वास्तविक मुद्दों की बजाय नाम बदलने जैसी कवायद में बर्बाद किया जा रहा है।
मनरेगा के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों ने भी सरकार को घेरा है। तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने इसे महात्मा गांधी का अपमान बताया, जबकि सीपीआईएम महासचिव एमए बेबी ने कहा कि यह बदलाव मनरेगा के अधिकार-आधारित ढांचे को कमजोर करेगा और ग्रामीण संकट को और गहरा करेगा। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार फंड में कटौती कर जिम्मेदारी राज्यों पर डाल रही है, जिससे गरीब मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
सरकार का कहना है कि यह बदलाव ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के तहत किया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार, गारंटीयुक्त रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 किए जाएंगे। मजदूरी का भुगतान 7 से 15 दिनों के भीतर अनिवार्य होगा और देरी होने पर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान भी किया गया है। कार्यों को जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका अवसंरचना और आपदा प्रबंधन—चार श्रेणियों में बांटा जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पिछले 20 वर्षों में मनरेगा ने ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार दिया है और बदलते सामाजिक-आर्थिक हालात को देखते हुए योजना का सुदृढ़ीकरण जरूरी है।
मनरेगा के साथ-साथ कांग्रेस ने दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि केवल वर्गीकृत प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP) पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, GRAP संकट प्रबंधन तक सीमित है, जबकि प्रदूषण से बचाव के लिए दीर्घकालिक और ठोस नीति की जरूरत है।

