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यमुना एक्सप्रेसवे हादसा: अपनों की तलाश में टूटे परिवार

Relatives searching for missing family members after Yamuna Expressway accident amid dense fog in Uttar Pradesh

उत्तर प्रदेश में घने कोहरे और शीतलहर के बीच हुए यमुना एक्सप्रेसवे हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। बुधवार को भी यह साफ नहीं हो सका कि इस दर्दनाक हादसे में कितने लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है। अब तक केवल तीन लोगों की ही पहचान हो पाई है, जबकि 20 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। आग की चपेट में आने से मोबाइल फोन, सामान और पहचान से जुड़े दस्तावेज जल गए, जिससे परिजन असहाय होकर अस्पतालों, पोस्टमार्टम हाउस और पुलिस कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

हादसे के बाद से यात्रियों, बस चालकों, परिचालकों और क्लीनरों के परिजन अपने अपनों की तलाश में भटक रहे हैं। मोबाइल फोन बंद हैं और संपर्क के सभी रास्ते टूट चुके हैं। बुधवार को पोस्टमार्टम हाउस में 20 से अधिक लोग सिर्फ इस उम्मीद में पहुंचे कि शायद किसी तरह अपने प्रियजन की जानकारी मिल जाए। हर चेहरे पर चिंता, आंखों में आंसू और एक ही सवाल—“हमारे अपने कहां हैं?”

हमीरपुर के गुहांड निवासी ब्रजभाग अपने 28 वर्षीय बेटे देवेंद्र की तलाश में पहुंचे। उन्होंने बताया कि देवेंद्र सोमवार रात करीब आठ बजे नोएडा के लिए स्लीपर बस से निकला था। मंगलवार रात नौ बजे तक बातचीत हुई, इसके बाद फोन बंद हो गया। देवेंद्र परिवार का इकलौता कमाने वाला था और उसकी शादी पिछले साल फरवरी में हुई थी। वहीं फतेहपुर के राजकुमार अपने भाई नरेंद्र यादव को खोज रहे हैं, जो नोएडा में हलवाई का काम करते थे और कानपुर से डबल डेकर बस में सवार हुए थे।

संभल जिले के बहजोई निवासी जगदीश पाल अपने बेटे पंकज कुमार की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। पंकज लक्ष्मी होलीडे कंपनी की बस से यात्रा कर रहे थे, लेकिन दो दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। बांदा के राजीव अपने 15 वर्षीय भतीजे ऋषभ की तलाश में हैं, जबकि ऋषभ के पिता गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। इसके अलावा बस्ती के दीपक पांडे, संभल के रजा हुसैन, और कई अन्य परिजन अपने-अपने रिश्तेदारों की खोज में पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे।

चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, शवों की पहचान के लिए डीएनए मिलान प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब तक 11 परिजनों के रक्त नमूने लिए जा चुके हैं, जिन्हें जांच के लिए आगरा स्थित फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया संवेदनशील है और इसमें कम से कम एक सप्ताह का समय लग सकता है। हर गुजरते घंटे के साथ परिजनों की पीड़ा और बढ़ती जा रही है। यह हादसा केवल जिंदगियां ही नहीं, बल्कि कई घरों की शांति और नींद भी छीन ले गया है।

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