नई दिल्ली: देशभर की करीब 27 लाख आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के श्रमिक दर्जे, न्यूनतम मजदूरी तथा सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर भारतीय जनता मजदूर संघ (बीजेएमएस) ने बड़ा ऐलान किया है। संघ ने 31 दिसंबर 2025 को राष्ट्रव्यापी पत्र एवं ज्ञापन अभियान चलाने का निर्णय लिया है।संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शांत प्रकाश जाटव की अध्यक्षता में हुई कोर कमेटी की बैठक में यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक में तय किया गया कि 31 दिसंबर को देशभर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा एवं आशा फैसिलिटेटर कार्यकर्ता तथा संघ के पदाधिकारी एकजुट होकर केंद्र सरकार के नाम ज्ञापन सौंपेंगे। जिला स्तर पर जिलाधिकारियों को सामूहिक ज्ञापन दिए जाएंगे, जबकि केंद्रीय कार्यालय से जारी एक समान पत्र प्रारूप को प्रिंट कर हस्ताक्षरित करके स्पीड पोस्ट एवं डाक से भारत सरकार को भेजा जाएगा। हर पत्र पर कार्यकर्ता का नाम, पता और मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से अंकित करना होगा।राष्ट्रीय अध्यक्ष शांत प्रकाश जाटव ने सभी कार्यकर्ताओं से एकजुटता और अनुशासन के साथ अभियान में भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा, “यह लड़ाई मानदेय की नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और श्रमिक पहचान की है। 27 लाख बहनों की एकजुट आवाज सरकार को न्यायपूर्ण निर्णय लेने के लिए मजबूर करेगी।”
बीजेएमएस की राष्ट्रीय संयुक्त सचिव छाया सिंह ने कहा कि नए न्यायिक निर्णय की प्रतीक्षा किए बिना पूर्व सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों के आधार पर इन कार्यकर्ताओं को तत्काल श्रमिक दर्जा, न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए। करीब 27 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं इस अभियान में शामिल होंगी और यह महिला श्रमिकों के अधिकारों के लिए ऐतिहासिक कदम साबित होगा।
राष्ट्रीय महामंत्री एवं दिल्ली प्रदेश प्रभारी चौधरी चरण सिंह ने कहा कि आंगनबाड़ी एवं आशा कार्यकर्ताओं से नियमित कार्य लिया जाता है, वे स्वयंसेवी नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार, पारिश्रमिक प्राप्त करने वाला व्यक्ति श्रमिक की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद वर्षों से इन कार्यकर्ताओं को श्रमिक दर्जा नहीं दिया गया, जो श्रम कानूनों एवं न्यायिक सिद्धांतों के विरुद्ध है।
यह अभियान आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं की लंबे समय से चली आ रही मांगों को बल प्रदान करेगा, जिनमें श्रमिक दर्जा, न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा प्रमुख हैं। देशभर में इन कार्यकर्ताओं की भागीदारी से अभियान को व्यापक समर्थन मिलने की उम्मीद है।

