बिहार में जमीन निबंधन प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए नीतीश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य में जमीन की रजिस्ट्री के समय GIS Mapping अनिवार्य की जाएगी। इसके तहत संबंधित प्लॉट का अक्षांश-देशांतर (Latitude-Longitude) और वास्तविक फोटो पोर्टल पर अपलोड करना जरूरी होगा। इस कदम का उद्देश्य जमीन से जुड़ी धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह लगाम लगाना है।
निबंधन डीआईजी सुशील कुमार सुमन ने बताया कि इस योजना के लिए विशेष सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है, जिसे जल्द ही पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। GIS मैपिंग शुरू होने के बाद नागरिक ऑनलाइन अपने निबंधित प्लॉट को देख सकेंगे, जिससे एक ही जमीन को बार-बार बेचने जैसी गड़बड़ियों पर रोक लगेगी और भूमि रिकॉर्ड का पूर्ण डिजिटलीकरण संभव होगा।
विभाग द्वारा लागू ई-निबंधन प्रणाली के भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। जुलाई से 19 दिसंबर तक 6.20 लाख से अधिक लोगों को उनकी रजिस्टर्ड डीड की डिजिटल कॉपी उसी दिन व्हाट्सएप के जरिए भेजी गई है। अब लोग घर बैठे ऑनलाइन आवेदन, फीस भुगतान और अपॉइंटमेंट बुकिंग कर सकते हैं, जबकि कार्यालय में सिर्फ एक बार बायोमेट्रिक और KYC प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

