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बांग्लादेश में हिंसा को शह देने का आरोप, संपादक परिषद ने अंतरिम सरकार पर उठाए सवाल

बांग्लादेश में पत्रकारिता और सांस्कृतिक संस्थानों पर हुए हमलों को लेकर बड़ा आरोप सामने आया है। देश के प्रमुख समाचार पत्रों की संपादक परिषद के अध्यक्ष नूरूल कबीर ने अंतरिम सरकार के एक धड़े पर हिंसा को रोकने में जानबूझकर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। यह हिंसा ‘इंकलाब मंच’ के नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की थी।

शरीफ उस्मान हादी को 12 दिसंबर को ढाका में चुनाव प्रचार के दौरान सिर में गोली मारी गई थी। गंभीर हालत में उन्हें सिंगापुर ले जाया गया, जहां 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। उसी शाम उग्र भीड़ ने ढाका में स्थित प्रमुख अखबारों डेली स्टार और प्रोथोम आलो के कार्यालयों में आगजनी की। इसके अलावा, 50 साल पुराने सांस्कृतिक संगठनों छायानात और उदिची शिल्पी गोष्ठी को भी नुकसान पहुंचाया गया। हिंसा के दौरान मैमनसिंह में एक हिंदू मजदूर की पीट-पीटकर हत्या की भी पुष्टि हुई है।

ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट्स सेंटर (BJC) के एक कार्यक्रम में नूरूल कबीर ने कहा कि हमलों से पहले ही इन संस्थानों पर हमले की सार्वजनिक घोषणा हो चुकी थी और सरकार को इसकी पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के एक वर्ग ने जानबूझकर हिंसा को जारी रहने दिया। इस बयान के बाद बांग्लादेश में मीडिया स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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