पूर्णिया से सांसद और कांग्रेस नेता राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के लिए आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। उनकी जमानत याचिका पर एमपी-एमएलए विशेष अदालत में सुनवाई होनी है, जिसके बाद यह तय होगा कि उन्हें फिलहाल जेल में रहना पड़ेगा या अदालत से राहत मिलेगी। हाल ही में उनकी गिरफ्तारी के बाद सियासी हलकों में बयानबाजी तेज हो गई है। समर्थक इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि सरकार इसे कानून की प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है। सुनवाई को लेकर कोर्ट परिसर और आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
गौरतलब है कि पप्पू यादव को शुक्रवार रात पटना के मंदिरी स्थित आवास से भारतीय दंड संहिता की धारा 467 (दस्तावेजों की जालसाजी) के तहत गिरफ्तार किया गया था। शनिवार को अदालत में पेशी के बाद उन्हें दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उन्हें पीएमसीएच के कैदी वार्ड में रखा गया था, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनकी जांच हुई। चिकित्सकों ने उनकी हालत सामान्य बताई और अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत नहीं होने पर रविवार को उन्हें बेऊर जेल भेज दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार उनका ब्लड प्रेशर थोड़ा बढ़ा हुआ था, लेकिन स्थिति स्थिर और नियंत्रण में है।
इस बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की पटना जिला परिषद ने पप्पू यादव की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने इसे 31 साल पुराने मामले में की गई राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया है और अविलंब रिहाई की मांग की है। भाकपा नेताओं ने कहा कि कोरोना महामारी और आपदा के समय पप्पू यादव ने आम लोगों की खुलकर मदद की थी, इसके बावजूद उनकी गिरफ्तारी न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। उल्लेखनीय है कि यह मामला वर्ष 1995 का है, जिसमें गर्दनीबाग थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। लंबे समय तक अदालत में अनुपस्थिति के कारण पहले वारंट, इश्तेहार और फिर 3 फरवरी 2026 को कुर्की-जब्ती का आदेश जारी किया गया था।

