पटना।बिहार की प्रसिद्ध लेखिका अंबरी रहमान अपनी पुस्तक ‘मिट्टी की खुशबू’ के माध्यम से साहित्य जगत में एक सशक्त पहचान बना रही हैं। पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) की रहने वाली और वर्तमान में पटना में रह रही अंबरी रहमान की यह पुस्तक जीवन के संघर्ष, उम्मीद, धैर्य और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित है। पुस्तक को पाठकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और इसकी भावनात्मक प्रस्तुति लोगों के दिलों को छू रही है।
‘मिट्टी की खुशबू’ उन आम लोगों की कहानियों को सामने लाती है जो कठिन परिस्थितियों से जूझते हुए भी हार नहीं मानते। पुस्तक का संदेश है कि हर संघर्ष व्यक्ति को मजबूत बनाता है और जीवन की चुनौतियाँ भविष्य की नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करती हैं। यही सकारात्मक सोच इस पुस्तक को विशेष बनाती है।
लेखन के साथ-साथ अंबरी रहमान सामाजिक सेवा में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वे नियमित रूप से झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में जाकर जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा और आवश्यक जरूरतों में सहयोग करती हैं। उनका मानना है कि शिक्षा और संवेदनशीलता ही समाज में स्थायी परिवर्तन ला सकती है।
अंबरी रहमान अपनी सफलता और विचारों का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। उनका कहना है कि माता-पिता ने उन्हें ईमानदारी, करुणा और मानव सेवा का संस्कार दिया, जिसने उनके व्यक्तित्व और लेखन दोनों को दिशा दी। उनके अनुसार, सफलता तभी सार्थक है जब उससे समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों का जीवन बेहतर हो।
अपनी सोच साझा करते हुए अंबरी रहमान कहती हैं, “हम इस दुनिया में नफरत नहीं, बल्कि प्रेम और इंसानियत का संदेश फैलाने आए हैं। मानवता हमारी सबसे बड़ी पहचान है और हमें आपसी सम्मान, करुणा तथा समझदारी के साथ जीवन जीना चाहिए।”उनकी यही सोच उनकी पुस्तक ‘मिट्टी की खुशबू’ में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। पुस्तक पाठकों को यह विश्वास दिलाती है कि सहानुभूति, धैर्य और सकारात्मक सोच न केवल व्यक्ति के जीवन को बदल सकती है, बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।
साहित्य प्रेमियों का मानना है कि अंबरी रहमान की यह कृति केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, सामाजिक सरोकारों और प्रेरणादायी विचारों का दस्तावेज है। अपनी लेखनी और समाजसेवा के माध्यम से वे यह साबित कर रही हैं कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने का प्रभावी माध्यम भी हो सकता है।

