Nationalist Bharat
ब्रेकिंग न्यूज़

विभिन्न मांगों के साथ हजारों आशा व फैसिलिटेटर का पटना में आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन

पारितोषिक नहीं 21 हजार मानदेय और स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी घोषित करने की मांग
मांग पूरा नहीं होने पर अप्रैल में हड़ताल की चेतावनी – शशि यादव।
मांगों पर 23 मार्च को होगा सरकार स्तर पर वार्ता।
मोदी विश्वशघाती और नीतीश सरकार कर रही वादाखिलाफी – रणविजय कुमार ।
आशाकर्मियों को माले विधायक दल नेता महबूब आलम,उप नेता सत्यदेव राम व विधायक महानंद सिंह ने किया संबोधित

पटना:ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ आशाओं की कोरोना काल मे सराहनीय भूमिका की चर्चा विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा पटना उच्च न्यायालय तारीफ की है। बार बार न्यायोचित मांगें रखी गई लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने आशा कार्यकर्ता व आशा फैसिलिटेटर की मांगे पूरा करने के बजाए बजट 2023 में आशाओं की कोई चर्चा नहीं कर आशा के साथ विश्वासघात किया है वहीं महागठबंधन के घोषणा पत्र में आशाओं को इंसाफ देने का ऐलान करने वाले युवा नेता तेजस्वी यादव आज खुद उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री हैं,लेकिन राज्य सरकार की ओर से आशाओं के हित में अभीतक कोई कदम नही उठाया गया है। इससे आक्रोशित आशाओं व फैसिलिटेटर की अभिव्यक्ति आज के प्रदर्शन में हुई की राज्य भर से हजारों की संख्या में आशा व आशा फैसिलिटेटर हाथों में मांगों की तख्ती लिए राजधानी की सड़कों पर मार्च कर रही थीं।

कर्मचारी महासंघ (गोप गुट) और ऐक्टू से संबद्ध बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ के बैनर तले संघ अध्यक्ष शशि यादव,महासचिव विद्यापति पांडे,कविता कुमारी,सुनैना,शबनम, सब्या पांडे,मालती राम,सीता पाल कुसुम, आशा,सुनीता,पूनम,संध्या, निर्मला,
चंद्रकला,सुशीला,उर्मिला,तारा आदि के नेतृत्व में हजारों आशा व आशा फैसलिटेटर ने आज पारितोषिक नही,मासिक मानदेय देना होगा, एक हजार में दम नही 21 हजार से मासिक मानदेय कम नही,आशा व फैसिलिटेटर को स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी घोषित करो,पेंशन योजना लागू करो,10 लाख का एकमुश्त रिटायरमेंट लाभ दो, कोरोना काल के बकाया का भुगतान करो की मांग करते व इसी आशय का पुरजोर नारा लगाते हुए आज रपटना के गर्दनीबाग से आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन निकाला जो गर्दानीबाग धरना स्थल तक पहुंच आम सभा में तब्दील हो गया।

आम सभा को आशा कार्यकर्ता संघ व उक्त नेताओं के अलावे खासतौर से बिहार विधान सभा में आशाओं के मांगों के समर्थन में आवाज उठाने वाले माले विधायक दल नेता महबूब आलम,उप नेता सत्यदेव राम व विधायक महानंद सिंह ने खासतौर से संबोधित किया। माले के तीनों विधायकों ने संबोधित करते हुए आशाओं का आह्वान किया कि अपनी मांगों के लिए सड़कों पर जोरदार ढंग से संघर्ष करें हम आपकी मांगों पर विधान सभा में सरकार से लड़ेंगे, तीनों विधायकों ने कहा की कोई भी सरकार हो आपको संघर्ष करते रहना होगा तभी कोई सरकार आपकी मांगें पूरा करेगी। आगे कहा कि आपके आंदोलन और मांगों से माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अवगत कराते हुए मांगें पूरी करने की मांग किया गया,तब मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद आगामी 23 मार्च को सरकार के स्तर पर संघ नेताओं के साथ वार्ता तय हुआ है। तीनों माले विधायकों ने मोदी सरकार पर जोरदार हमला करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आशाओं से काम लिया जाता है लेकिन आशाओं के मेहनताना बढ़ाने ,सेवा सुरक्षा प्रदान करने को लेकर मोदी सरकार न सिर्फ लापरवाह है बल्कि विश्वासघात कर रही है और अदानी – अंबानी के हित में काम कर रही है। साथ ही देश के आशा सहित मेहनतकश समुदाय के हिस्से में हिंदू – मुस्लिम नफरत का कारोबार कर रही है, माले नेताओं ने केंद्र की मोदी सरकार से अपना हिस्सा लेने के लिए आशाओं से संघर्ष का आह्वान किया।

प्रदर्शन के बाद आयोजित सभा को संबोधित करते हुए संघ की अध्यक्ष और स्कीम वर्कर्स की राष्ट्रीय संयोजक शशि यादव ने कहा कि हमने माननीय उप मुख्यमंत्री सह स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी यादव से मिलकर आशा व आशा फैसिलिटेटर के चिर लंबित मांगों और समस्याओं को उनके समक्ष रखते हुए मांगें पूरा करने का आग्रह बिहार सरकार से बार बार किया है। उन्होंने कहा कि आशा व आशा फैसिलिटेटर दिन रात काम करेंगी और उनका परिवार इस भीषण मंहगाई में तंगहाली में रहेगा,ऐसा नही होगा। बिहार सरकार को पारितोषिक नाम को बदल मासिक मानदेय करना होगा और एक हजार के बजाए सम्मानजनक मानदेय देना होगा।

उन्होंने आशाओं को केंद्र सरकार से 21 हजार मानदेय देने की मांग करते हुए कहा कि मोदी सरकार आशा सहित देश के सभी स्कीम वर्करों के साथ विश्वासघात किया है और पूरे देश की आशा उनके विश्वासघात के खिलाफ लड़ रही हैं और उन्हें जरूर सबक सिखाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि मोदी सरकार के खिलाफ बिहार सरकार को सिर्फ गाल बजाने के बजाए आशाओं के साथ किया वादा पूरा करना होगा ।उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों यथा केरल,त्रिपुरा, आंध्र, कर्नाटक, तेलांगना, राजस्थान, बंगाल की तरह नियत मासिक मानदेय बिहार के आशा को देना होगा।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आशा की सेवा और मिहनत पर राज्य के ग्रामीण अस्पताल और स्वास्थ्य अभियान चल रहे हैं।हम यहां ऐलान करने आए हैं कि अगर हमारी मांगों को विधानसभा के बजट सत्र में पूरा नही किया गया तो अप्रैल महीने के किसी भी दिन से आशा व आशा फैसिलिटेटर सामूहिक अवकाश-हड़ताल पर चली जायेंगी. हङताल संयुक्त होगा अन्य संगठनों से भी बात चल रहीं हैं।अच्छी बात है कि आज विधानसभा में इस विषय पर माले सहित कई विधायक चर्चा कर रहे हैं।

प्रदर्शन में खासतौर से शामिल नेताओं विद्यालय रसोइया संघ की महासचिव सह ऐपवा राज्य अध्यक्ष सरोज चौबे, ऐक्टू राज्य सचिव रणविजय कुमार,राज्य उपाध्यक्ष एस के शर्मा,ऐक्टू नेता जितेंद्र कुमार,मुर्तजा अली,महासंघ (गोप गुट) नेता कृष्णनंदन सिंह , सुदिष्ट नारायण झा,आदि ने आशाओं को संबोधित किया और आंदोलन के प्रति एकजुटता जाहिर करते हुए मोदी सरकार को विश्वासघाती बताया और नीतीश सरकार पर वादाखिलाफी करने का आरोप लगाया।

बिहार में खुलेंगे 8000 कौशल विकास केंद्र, 20 लाख युवाओं को प्रशिक्षण के साथ इंटर्नशिप

3000 महिलाओं का बलात्कार करने वाले को चुपके से विदेश भेज देंगे लेकिन…

बिहार में राजग पूरी तरह मजबूत और एकजुट है:आरसीपी सिंह

देवेंद्र फडणवीस होंगे महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री

फेशियल रिकग्निशन से रुकेगी फर्जी वोटिंग पंचायत चुनाव में हाईटेक बिहार

Nationalist Bharat Bureau

पटना में एक दिसंबर से बड़ा अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू

Nationalist Bharat Bureau

सीएम नीतीश बंद कमरे में करेंगे प्रत्याशियों से मुलाकात

Nationalist Bharat Bureau

Bihar Nikay Chunav 2022:विस उपाध्यक्ष की पत्नी मेयर का चुनाव हारीं, राबड़ी कैबिनेट के पूर्व मंत्री वार्ड कौंसलर बने

Nationalist Bharat Bureau

दिल्ली चुनाव: AAP और बीजेपी के बीच बढ़ी जुबानी जंग, केजरीवाल और पुरी आमने-सामने

Nationalist Bharat Bureau

वृद्धा पेंशन, मुफ्त बिजली और किसानों की कर्ज माफी की मांग पर साजिया खातून का आंदोलन, 300 किमी पैदल यात्रा के बाद पटना पहुंचीं

Nationalist Bharat Bureau

Leave a Comment