बिहार में शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों से जुड़े मामलों पर सरकार ने सख्ती तेज कर दी है। राज्य में 3014 निजी विद्यालयों की प्रस्वीकृति (मान्यता) से जुड़े मामले अभी भी पोर्टल पर लंबित हैं, जबकि नामांकन के लिए तय इनटेक कैपेसिटी पूरी नहीं करने वाले 4602 निजी विद्यालयों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि आरटीई से जुड़े सभी लंबित मामलों का निपटारा 14 फरवरी तक हर हाल में किया जाए। इसके साथ ही प्रस्वीकृति प्राप्त निजी स्कूलों को 25 जनवरी तक अनिवार्य रूप से अपनी सीटें भरने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन समय सीमा के बावजूद बड़ी संख्या में स्कूलों ने इसका पालन नहीं किया।
शिक्षा विभाग ने इनटेक कैपेसिटी पूरी न करने वाले 4602 निजी विद्यालयों से स्पष्टीकरण मांगा है और जिला शिक्षा पदाधिकारियों को जवाब के आधार पर नियमों के तहत सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए नामांकन को लेकर कुल 65 हजार 505 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं, लेकिन इनमें से 34 हजार 374 आवेदन अब भी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों के स्तर पर जांच और सत्यापन के लिए लंबित हैं। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए विभाग ने सभी लंबित आवेदनों का सत्यापन कार्य तुरंत पूरा कराने का आदेश दिया है।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि सत्यापन प्रक्रिया में शिथिलता पाई गई, तो संबंधित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विभागीय समीक्षा में यह भी सामने आया है कि आरटीई के तहत नामांकित बच्चों के एवज में प्रस्वीकृति प्राप्त निजी स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि के भुगतान के लिए जिलों में जांच प्रक्रिया चल रही है। जिन जिलों से जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है, वहां भुगतान की कार्रवाई शुरू कर दी गई है, जबकि जिन जिलों से अब तक रिपोर्ट नहीं मिली है, उन्हें तुरंत पोर्टल पर रिपोर्ट अपलोड करने का निर्देश दिया गया है, ताकि संबंधित निजी विद्यालयों को समय पर भुगतान किया जा सके।

