पटना:राज्य भर के सभी ब्लॉकों में स्वीकृत मॉडल स्कूलों में विषयवार शिक्षकों के तबादले/नियुक्ति के लिए जारी ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में उर्दू विषय को पूरी तरह नजरअंदाज किए जाने का मामला सामने आया है। आवेदन फॉर्म में कहीं भी उर्दू विषय का पद शामिल नहीं किया गया है, जिस पर उर्दू पढ़ने और पढ़ाने वालों में गहरी नाराजगी व्याप्त है।शैक्षणिक हलकों का कहना है कि बिहार जैसे राज्य में, जहां उर्दू दूसरी सरकारी भाषा का दर्जा रखती है, ऐसी लापरवाही न केवल चिंताजनक है बल्कि उर्दू पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय भी है। इस मामले ने उर्दू शिक्षकों और छात्रों के बीच बेचैनी पैदा कर दी है।
बिहार स्टेट उर्दू टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कमर मिस्बाही ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ऑनलाइन आवेदन में उर्दू शिक्षकों के लिए उर्दू का पद आरक्षित न करना एक गंभीर भूल या सुनियोजित साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि यदि यह तकनीकी खामी है तो उसे तुरंत सुधार दिया जाए, और यदि किसी की लापरवाही या बदनीयती शामिल है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
कमर मिस्बाही ने बिहार के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर बिहार की दूसरी सरकारी भाषा के संरक्षण के लिए उक्त मामले को गंभीरता से लेने और फौरन ऑनलाइन पोर्टल में उर्दू विषय का पद शामिल कराने की मांग की है। ताकि उर्दू शिक्षक भी मॉडल स्कूलों में उर्दू छात्रों को उर्दू पढ़ा सकें।साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामले में उर्दू शिक्षक कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे। बल्कि उर्दू भाषा के विकास के लिए कानून के दायरे में रहकर संघर्ष करेंगे। कमर मिस्बाही ने आगे कहा कि यदि इस समस्या का जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो एसोसिएशन पूरे राज्य में कानून के दायरे में रहकर विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर हो जाएगी।यह मुद्दा बिहार में उर्दू भाषा और उसके शिक्षकों के अधिकारों को लेकर उठा है, जिसमें शिक्षा विभाग से त्वरित हस्तक्षेप की अपेक्षा की जा रही है।

